आमिना चार महीना पहले अपने पति के दुनिया से चले जाने के ग़म में थीं। उनका समूचा अस्तित्व प्रकाश से चमक रहा था। उनकी गोद में मानवता को मुक्ति दिलाने वाले सूरज का उदय हुआ। अकेले रात- दिन गुज़ारने का समय बीत गया। हज़रत मुहम्मद ने आंखे खोली। दुनिया आसमानी सुगंध से महक उठी। दोस्तो पथप्रदर्शन और सच्चाई के सूरज के जन्म दिवस पर शुभ अवसर पर एक बार फिर आप सबकी सेवा में हार्दिक बधाई प्रस्तुत करते हैं।
दुरूद व सलाम हो हज़रत मोहम्मद पर उस वक्त जब उन्होंने अपनी पेशानी ज़मीन पर रखी। दुरूद व सलाम हो हज़रत मोहम्मद पर उस समय जब उन्होंने अपनी माता को सलाम किया और फरिश्तों ने उनकी अद्वितीय सुन्दरता की सराहना की। दुरूद व सलाम हो हज़रत मोहम्मद पर उस वक्त जब ज़मीन उनकी मेज़बानी पर गर्व कर रही थी और आसमान इस मेज़बानी की कामना व अभिलाषा करते हुए कह रहा था कि काश इस मेज़बानी का सौभाग्य उसे प्राप्त होता।
दुरूद व सलाम हो हज़रत मोहम्मद पर उस समय जब उन्होंने महान ईश्वर की प्रशंसा व गुणगान में ज़बान खोली और मक्का की गलियों में एकेश्वरवाद की सुगंध फैला दी।
दोस्तो आज ही के दिन पैग़म्बरे इस्लाम के पौत्र इमाम जाफ़र सादिक़ अलैहिस्सलाम का भी जन्म हुआ था। इसलिए आप सबकी सेवा में दोबारा हार्दिक बधाई पेश करते हैं।
इमाम जाफ़र सादिक़ अलैहिस्सलाम कुल 65 वर्षों तक ज़िन्दा रहे जिनमें 34 वर्षों तक उनकी इमामत रही। इस दौरान उन्होंने इस्लाम धर्म के प्रचार -प्रसार की किसी भी कोशिश में संकोच से काम नहीं लिया। इमाम जाफ़र सादिक़ अलैहिस्सलाम ने भी अपने पूर्वजों की भांति पवित्र कुरआन और पैग़म्बरे इस्लाम की सुन्नत व परम्परा को मुसलमानों के मध्य एकता का सबसे महत्वपूर्ण आधार करार दिया। क्योंकि इस्लाम का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य एक शक्तिशाली इस्लामी राष्ट्र का गठन है जो शांति व सुरक्षा के साथ हो।
इस्लामी एकता का आधार धार्मिक शिक्षाएं हैं जो किसी समय से विशेष नहीं हैं और समस्त मुसलमान एकेश्वरवाद, प्रलय और पैग़म्बरे इस्लाम की पैग़म्बरी आदि के बारे में समान आस्था रखते हैं। इसी प्रकार नमाज़, रोज़ा, हज और ज़कात जैसे बहुत से धार्मिक आदेश हैं जो समस्त मुसलमानों के मध्य समान हैं। इस आधार पर इन समानताओं को आधार बनाकर घरेलू और विदेशी हर प्रकार के दुश्मन से मुकाबले के लिए एक मज़बूत व शक्तिशाली इस्लामी राष्ट्र का गठन किया जा सकता है।
इस्लाम धर्म की शिक्षा के अनुसार एक मुसलमान दूसरे मुसलमान का भाई है और किसी भी मुसलमान को अपने दूसरे मुसलमान भाई को काफिर कहने का अधिकार नहीं है। इस संबंध में इमाम जाफ़र सादिक़ अलैहिस्सलाम फरमाते हैं” जब एक मोमिन अपने दूसरे भाई से उफ कहता है तो वह उससे जुदा व अलग हो जाता है और अगर यह कहता है कि तुम काफिर हो तो उनमें से एक काफिर हो जाता है और अगर उस पर आरोप लगाता है तो जिस तरह से पानी में नमक घुल जाता है उसी तरह इस्लाम उसके दिल से पिघल जाता है। इसी प्रकार इमाम जाफ़र सादिक़ अलैहिस्सलाम एक अन्य स्थान पर फरमाते हैं” वह व्यक्ति ईश्वर की दया व कृपा से दूर है जो किसी मोमिन को काफिर कहे और जो मोमिन पर काफिर होने का आरोप लगाये वह उसके हत्यारे की भांति है।
इमाम जाफ़र सादिक़ अलैहिस्सलाम इस्लामी एकता बनाये रखने के लिए अपने अनुयाइयों से सिफारिश करते हैं कि वह अहले सुन्नत की नमाज़े जमाअत में भाग लें। आप फरमाते हैं” जो व्यक्ति पहली पंक्ति में अहले सुन्नत के साथ नमाज़ पढ़े वह उस व्यक्ति की तरह है जिसने पैग़म्बरे इस्लाम के साथ पहली पंक्ति में नमाज़ पढ़ी है।
एक अन्य रवायत में आया है जिसमें इमाम से सवाल किया गया कि क्या धार्मिक विरोधियों के साथ विवाह करना और उनके साथ नमाज़ जमाजत पढ़ना सही है? तो इमाम ने फरमाया यद्यपि यह कार्य तुम्हारे लिए बहुत कठिन है किन्तु जान लो कि पैग़म्बरे इस्लाम ने उससे विवाह किया जिसे तुम पसंद नहीं करते हो और अली ने भी ख़लिफाओं के पीछे नमाज़ पढ़ी है। बहरहाल इस प्रकार की समस्त रवायतें इस बात की सूचक हैं कि इमाम जाफ़र सादिक़ अलैहिस्सलाम भी दूसरे इमामों की भांति अहले सुन्नत की नमाज़े जमाअत में शामिल होते थे।
दोस्तो जैसाकि हमने कार्यक्रम के आरंभ में कहा था कि 17 रबीउल अव्वल को पैग़म्बरे इस्लाम ने भी इस दुनिया में क़दम रखा था। पैग़म्बरे इस्लाम समस्त आयाम से एक परिपूर्ण व सर्वश्रेष्ठ इंसान थे। उन पर वहि अर्थात ईश्वरीय संदेश उतरते थे। वह इंसानों को अज्ञानता से निकालने और उनकी मुक्ति के लिए आये। महान ईश्वर पवित्र कुरआन के सूरे अहज़ाब की 21वीं आयत में कहता है” बेशक पैग़म्बर का जीवन तुम्हारे लिए आदर्श है और जो ईश्वर की दया और प्रलय के दिन की आशा करते हैं वे उसे अधिक याद करते हैं।“
पैग़म्बरे इस्लाम ने महान व सर्वसमर्थ ईश्वर की उपासना और उसकी बंदगी करके वह स्थान प्राप्त कर लिया जिस स्थान तक महान ईश्वर के क़रीबी फरिश्ते जीब्राइल भी नहीं पहुंच सके। ईश्वर के निकट इतना महान स्थान होने के बावजूद पैग़म्बरे इस्लाम लोगों के मध्य साधारण तरीक़े से रहते थे इस प्रकार से कि जब कोई अजनबी आता था तो उसके लिए यह पहचानना कठिन हो जाता था कि लोगों में पैग़म्बरे इस्लाम कौन हैं। जब कोई नया व्यक्ति आता था तो वह लोगों से पूछता था कि तुममें मोहम्मद कौन हैं? तो पैग़म्बरे इस्लाम विन्रमता का अपना उपर उठाते और कहते थे कि मैं मोहम्मद हूं। पैग़म्बरे इस्लाम के सेवक अनस बिन मालिक कहते हैं” लोग पैग़म्बर से अधिक किसी से भी प्रेम नहीं करते थे। इसके बावजूद जब वह आते थे तो कोई उनके सम्मान में खड़ा नहीं होता था क्योंकि सबको पता था कि पैग़म्बर इस कार्य को पसंद नहीं करते हैं।“
इस बात में कोई संदेह नहीं है कि जो इंसान सच्चाई और पवित्रता का मार्ग तय करना चाहता है, पैग़म्बरे इस्लाम की महान हस्ती से परिचय उसकी सहायता करेगी। पैग़म्बरे इस्लाम की महान हस्ती से परिचित होने के बारे में ईरान की इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामनेई कहते हैं” किसी भी इंसान के अंदर इस बात की क्षमता नहीं है कि वह पैग़म्बरे इस्लाम के जीवन के समस्त आयामों को पूरी तरह बयान कर सके और इस बात की भी क्षमता नहीं है कि वह पैग़म्बरे इस्लाम के महान व्यक्तित्व से निकट की भी तस्वीर पेश कर सके और जो कुछ हम पूरे ब्रह्मांड में चुने हुए और समस्त पैग़म्बरों के सरदार के बारे में जानते हैं वह मात्र उस महान हस्ती की एक छाया है और इसी सीमा तक मुसलमानों का उस महान हस्ती से परिचय काफी है। यही परिचय परिपूर्णता की ओर जहां इंसान के प्रयास को गैरेन्टी प्रदान करेगा वहीं यही परिचय मुसलमानों के मध्य एकता व एकजुटता का आधार बनेगा। इस आधार पर पूरी दुनिया के मुसलमानों से मेरा आह्वान यह है कि पैग़म्बरे इस्लाम के व्यक्तित्व, उनके जीवन, सदाचरण और नैतिकता के आयामों पर अधिक कार्य किया जाना चाहिये। इसी प्रकार वरिष्ठ नेता ने कहा कि पैग़म्बरे इस्लाम के हवाले से जो शिक्षाएं हम तक पहुंची हैं उनके बारे में अधिक कार्य किया जाना चाहिये।
यहां हम बहुत संक्षेप में पैग़म्बरे इस्लाम के जीवन के एक व्यवहार पर प्रकाश डाल रहे हैं।
मक्का नगर के लोगों ने मज़ाक उड़ा कर और पत्थर मार कर अंतिम ईश्वरीय दूत को नगर से निकाल दिया। पैग़म्बरे इस्लाम दुःखी व क्षुब्ध मन के साथ नगर के किनारे बाग़ में एक पेड़ के नीचे बैठ गये। आसमान की ओर देखा और कहा हे मेरे पालनहार! हर दयालु से अधिक तू दयालु व कृपालु है तू कमज़ोरों का और मेरा पालनहार है। तेरी राह में हर कठिनाई स्वीकार्य और आसान है परंतु हे मेरे पालनहार मेरे लिए तेरी सहायता अधिक प्रिय है। मैं तेरी शरण चाहता हूं तेरा प्रकाश हर अंधेरे को समाप्त कर देगा। महान ईश्वर से पैग़म्बरे इस्लाम की प्रार्थना इतनी आकर्षक व मनोहर थी कि बाग़ के मालिक और मर्तियों की पूजा करने वाले अत्बा और शैबा को परिवर्तित कर दिया और उन सबों ने अपने दास से कहा कि पैग़म्बर के लिए अंगूर ले जाये। दास अंगूर लेकर पैग़म्बरे इस्लाम के पास गया और वह बड़ी उत्सुकता से पैग़म्बरे इस्लाम का आध्यात्मिक व शांत चेहरा निहारने लगा और वह इस सोच में था कि लोगों ने इस महान व्यक्ति को क्यों कष्ट पहुंचाया? पैग़म्बरे इस्लाम दास को देखकर अपनी जगह से खड़े हो गये और उसका आभार व्यक्त किया। जब पैग़म्बरे इस्लाम ने अंगूर का एक दाना अपने मुंह में रखा तो कहा बिस्मिल्लाहिर्रहमानेर्रहीम यानी उस ईश्वर के नाम से जो बहुत दयालु व कृपालु है। दास ने आश्चर्य से कहा जो वाक्य आपने कहा यहां के लोग उसे नहीं जानते हैं। क्या आप अपने कार्य का आरंभ लात और उज़्ज़ा नामक बुतों के नाम से आरंभ नहीं करते हैं? पैग़म्बरे इस्लाम ने जवाब में कहा हर चीज़ उस पालनहार की है जो बहुत दयालु है, इसके बाद पैग़म्बरे इस्लाम ने उससे पूछा तुम कहां के रहने वाले हो? इस पर दास ने कहा मैं नैनवां का रहने वाला हूं यह वही शहर है जहां के हज़रत यूनुस रहने वाले थे। पैग़म्बरे इस्लाम ने बहुत ही प्रेम व नम्र भाव से कहा मेरे भाई यूनुस ईश्वरीय दूत थे जिस तरह मैं ईश्वरीय दूत हूं और लोगों के मार्गदर्शन और उनकी मुक्ति के लिए आया हूं। उसके बाद पैग़म्बरे इस्लाम ने हज़रत यूनुस के बारे में पवित्र कुरआन की आयत की तिलावत की। आत्मा को छू देने वाली पवित्र कुरआन की आयत ने दास को परिवर्तित कर दिया। उसने पैग़म्बरे इस्लाम का हाथ चूमा। बाग के मालिक दूर से सब कुछ देख रहे थे। उन्होंने बुरे अंदाज़ से दास को बुलाया। दास अंतिम ईश्वरीय दूत के दर्शन से बदल चुका था और उसने बाग़ के मालिकों की आवाज़ पर ध्यान दिये बिना कहा यह आदमी जो पेड़ के नीचे बैठा है, ज़मीन पर रहने वाले समस्त इंसानों का सरदार है। यह वही पैग़म्बर है जिसकी शुभ सूचना ईसा मसीह ने दी है। ईश्वर की सौगंध आज उसके धर्म के अलावा कोई भी धर्म ईश्वर के निकट स्वीकार्य नहीं है और जो भी उसका अनुसरण न करे वह गुमराह है।